JBKSS/JLKM की हड़ताल से मिला न्याय ✊🏻

S और JLKM: हड़ताल से मिला न्याय - श्रमिकों के अधिकारों की जीत

कैसे 14 घंटे के विरोध ने परिवर्तन लाया और पीड़ित परिवार को दिलाई उम्मीद

झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र के चौका थाना अंतर्गत नर्सिंग इस्पात कंपनी के गेट के बाहर 14 घंटे की हड़ताल ने आखिरकार पीड़ित परिवार के लिए न्याय का रास्ता खोला। झारखंड भाषा खतियान संघर्ष समिति (JBKSS) और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के निरंतर प्रयासों से यह संभव हो पाया।


"यह सफलता केवल मुआवजा और नौकरी तक सीमित नहीं है; यह दिखाती है कि श्रमिकों के अधिकारों के लिए एकता से लड़ाई लड़ी जा सकती है।"

कंपनी में हुई दुखद घटना, जिसने एक श्रमिक की जान ले ली, ने पीड़ित परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। JBKSS और JLKM ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और 14 घंटे की हड़ताल का आयोजन किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को झुकना पड़ा।

हड़ताल का परिणाम

रातभर चले इस विरोध के बाद निम्नलिखित समझौते किए गए:

  • पीड़ित परिवार को ₹12.5 लाख का मुआवजा प्रदान किया गया।
  • पीड़िता के परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी का आश्वासन दिया गया।
  • परिवार के लिए पेंशन योजना जल्द लागू करने का वादा किया गया।
  • श्राद्ध कर्म हेतु ₹50,000 नकद सहायता दी गई।


यह जीत केवल पीड़ित परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। JBKSS और JLKM की एकजुटता ने यह दिखाया है कि यदि लोग संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो वे बड़े से बड़े संस्थानों को झुकाने में सक्षम हैं।

भविष्य के लिए एक आशा की किरण

यह सफलता हमें याद दिलाती है कि न्याय की लड़ाई लंबी और कठिन हो सकती है, लेकिन संगठित प्रयासों और दृढ़ता से बदलाव संभव है। JBKSS और JLKM के नेतृत्व में हुए इस विरोध ने न केवल प्रभावित परिवार को राहत दी है, बल्कि पूरे समुदाय के श्रमिकों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया है।


यह क्षण उन सभी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि जमीनी स्तर पर आंदोलन बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकते हैं। यह केवल पीड़ित परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे श्रमिक समुदाय के लिए एक जीत है।

लेख :– बसंत महतो | www.jbkss.in

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