बुरुडीह डैम:– Jlkm कोल्हान वरिय उपाध्यक्ष रामदास मुर्मू ने उठाई स्थानीय लोगों की आवाज

बुरुडीह डैम पर्यटन स्थल: स्थानीय लोगों की समस्याओं और संघर्ष

बुरुडीह डैम, जो पूर्वी सिंहभूम जिले में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, अब स्थानीय लोगों के लिए एक नई समस्या का केंद्र बन गया है। झारखण्ड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के कोल्हान वरीय उपाध्यक्ष श्री रामदास मुर्मू के नेतृत्व में 'बुरुडीह डैम मुराहिड पर्यटन स्थल संरक्षण समिति' के द्वारा एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आवाज़ उठाई जा रही है, जिसका मुख्य विषय नौका लीज (नाव का ठेका) स्थानीय लोगों को देने का है।

समिति का तर्क है कि डैम से जुड़ी लीज़ पहले से ही आसपास के चार गाँव – बिरूडीह, हीरागंज, टिकरी और रामचंद्रपुर के लोगों को दी जा रही थी, जो उस क्षेत्र के निवासी हैं और वहां की आर्थिक व सामाजिक स्थिति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि डैम के निर्माण के कारण उनका खेत-खलिहान और आजीविका के साधन प्रभावित हुए हैं। वे विस्थापित हुए हैं और अब उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

परंतु, समिति के अनुसार इस बार नौका लीज किसी बाहरी व्यक्ति को दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि इस तरह की लीज़ का मुख्य फायदा स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए, क्योंकि वे ही सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। डैम से हुए विस्थापन के कारण स्थानीय लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है और वे अपनी भूमि और आजीविका से वंचित हो गए हैं। ऐसे में, लीज़ जैसी योजनाओं का उद्देश्य उनके पुनर्वास और रोजगार का प्रबंध करना होना चाहिए।

समिति ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय लोगों को नौका लीज नहीं दी जाती है, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। यह समस्या केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्वाभिमान और अधिकारों की भी लड़ाई है। स्थानीय समुदाय अपने अधिकारों के प्रति सजग और संगठित है, और वे अपने क्षेत्र में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इस गंभीर मुद्दे को लेकर समिति ने घाटशिला के एसडीओ को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें लीज़ की पुनः समीक्षा और इसे निरस्त करने की मांग की गई है। ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक उत्थान सुनिश्चित हो सके।

यह मुद्दा एक बार फिर से दर्शाता है कि किस प्रकार विकास परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय समुदायों को दरकिनार किया जाता है। जब किसी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और परियोजनाओं से सबसे अधिक प्रभावित लोग ही वंचित रह जाते हैं, तो इसका विरोध स्वाभाविक है।

क्यू है जरूरी?

बुरुडीह डैम से जुड़े इस विवाद का समाधान केवल प्रशासनिक निर्णयों से नहीं हो सकता, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों की आवाज और अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह जरूरी है कि ऐसी योजनाओं में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि वे भी विकास के फायदों से वंचित न रहें।

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